Essay on Computer In Hindi कम्प्यूटर पर हिन्दी निबंध

Essay on Computer In Hindi

कम्प्यूटर पर निबंध 

100, 200, 300, 600 

शब्दों में।

 

कम्प्यूटर पर निबंध 

प्रस्तावना – पिछले कई वर्षों से हमारे देश में कम्प्यूटरों की चर्चा जोर-शोर से हो रही है।  देश को कम्प्युटरमय करने के प्रयास किए जा रहे हैं। कई उद्योग-धंधों और संस्थानों में कम्प्यूटर का प्रयोग होने लगा है। कम्प्यूटरों के आयात के लिए देश के द्वार खोल दिए गए हैं। हमारे अधिकारी और मंत्रीगण सुपर कम्प्यूटरों के लिए अमेरिका से जापान तक दौड़ लगा रहे हैं।  सरकारी प्रतिष्ठानों में तो आधुनिकतम कम्प्यूटर लगाने की भारी होड़ लगी है।

कम्प्यूटर क्या है – हमारे सामाजिक, राजनैतिक और आर्थिक जीवन पर छा जानेवाला कम्प्यूटर आखिर क्या है ? इस विषय में जिज्ञासा उत्पन्न होना स्वाभाविक है। वस्तुतः कम्प्यूटर ऐसे यान्त्रिक मस्तिष्कों का समन्वयात्मक एवं गुणात्मक योग है, जो तीव्रतम गति से तथा न्यूनतम समय में त्रुटिहीन गणना कर सकता है।

मानव सदैव से ही अपनी गणितीय गणनाओं के लिए गणना-यंत्रों का प्रयोग करता रहा है। इस कार्य के लिए प्रयोग की जानेवाली प्राचीन मशीनों में अबेकस पहला साधन था। वर्तमान समय में अनेक प्रकार के जटिल गणना-यंत्र बना लिए गए हैं, जो जटिल-से-जटिल गणनाओं के परिकलन स्वतः ही कर लेते हैं। इस सबमें सर्वाधिक तीव्र, शुद्ध एवं उपयोगी गणना करनेवाला यंत्र कम्प्यूटर ही है

चार्ल्स बेबेज पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने 19वीं  शताब्दी के आरम्भ में पहला कम्प्यूटर बनाया। यह कम्प्यूटर लम्बी-लम्बी गणनाएँ कर उनके परिणामों को मुद्रित कर देता था।

कम्प्यूटर स्वयं ही गणनाएँ करके जटिल-से-जटिलसमस्याओं के हल मिनटों और सेकेण्डों में निकाल सकता है, जिन समस्याओं का हल करने के लिए मनुष्य को कई दिन, यहाँ तक कि महीनों लग सकते हैं। कम्प्यूटर से की जानेवाली गणनाओं के लिए एक विशेष भाषा में निर्देश तैयार किए जाते हैं। इन निर्देशों और सूचनाओं को कम्प्यूटर का “प्रोग्राम” कहा जाता है।  यदि कम्प्यूटर से प्राप्त होनेवाले परिणाम अशुद्ध हैं तो इसका तात्पर्य यह है कि उनके “प्रोग्राम” में कहीं-न-कहीं त्रुटि रह गई है, इसमें यंत्र का कोई दोष नहीं है।

Essay on Computer In Hindi/ What is The Computer कम्प्यूटर क्या है।  

कम्प्यूटर और उसके उपयोग – आज जीवन के कितने ही क्षेत्रों में कम्प्यूटर के व्यापक प्रयोग हो रहे हैं। बड़े-बड़े व्यवसाय, तकनीकी संस्थान और महत्त्वपूर्ण प्रतिष्ठान कम्प्यूटर के यंत्र-मस्तिष्क का लाभ प्राप्त कर रहे हैं। अब तो कम्प्यूटर केवल कार्यालयों के वातानुकूलित कक्षों तक ही सीमित नहीं रह गए हैं, वरन वह हजारों किलोमीटर दूर रखे हुए दूसरे कम्प्यूटर के साथ बातचीत कर सकते हैं, उससे सूचनाएँ प्राप्त कर सकते हैं और उसे सूचनाएँ भेज भी सकते हैं।

कम्प्यूटर और मानव-मस्तिष्क – यह प्रश्न भी बहुत स्वाभाविक है कि क्या कम्प्यूटर और मानव-मस्तिष्क की तुलना की जा सकती है और इसमें कौन श्रेष्ठ है; क्योंकि कम्प्यूटर के मस्तिष्क का निर्माण भी मानव-बुद्धि के आधार पर ही सम्भव हुआ है।  यह बात नितान्त सत्य है कि मानव मस्तिष्क की अपेक्षा कम्प्यूटर समस्याओं को बहुत कम समय में हल कर सकता है; किन्तु वह मानवीय संवेदनाओं, अभिरुचियों, भावनाओं और चित्त से रहित मात्र एक यंत्र-पुरुष है।  कम्प्यूटर केवल वही काम कर सकता है; जिसके लिए उसे निर्देशित किया गया हो। वह कोई निर्णय स्वयं नहीं ले सकता और न ही कोई नवीन बात सोच सकता है।

उपसंहार – भारत जिस गति से कम्प्यूटर-युग की ओर बढ़ रहा है, उसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि हम अपने आपको सम्पूर्ण रूप से कम्प्यूटर के हवाले करने के लिए विवश किए जा रहे हैं। कम्प्यूटर हमें बोलना, व्यवहार करना, अपने जीवन को जीना, मित्रों से मिलना और उनके विषय में ज्ञान प्राप्त करना आदि सबकुछ सिखाएगा। इसका अभिप्राय यह हुआ कि हम जीवन के प्रत्येक मोड़ पर कम्प्यूटर पर आश्रित हो जाएँगे।  यह सही है कि कम्प्यूटर में जो कुछ भी एकत्र किया गया है, वह आज के असाधारण बुद्धिजीवियों की देन है, लेकिन हम यह प्रश्न भी पूछने के लिए विवश हैं कि जो बुद्धि या जो स्मरण-शक्ति कम्प्यूटर को दी गई है, क्या उससे पृथक हमारा कोई अस्तित्व नहीं है ? हो भी, तो क्या यह बात अपने-आप में कुछ कम दुःख दायी नहीं है कि  हम अपने प्रत्येक भावी कदम को कम्प्यूटर के माध्यम से प्रमाणित करना चाहें और उसके परिणामस्वरूप अपने-आपको निरंतर कमजोर, हीन एवं आयोग्य बनाते रहें।

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