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Home >> Essay Of Raksha Bandhan In Hindi रक्षाबंधन पर निबंध
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Essay Of Raksha Bandhan In Hindi रक्षाबंधन पर निबंध

By Shivam KasyapAugust 19, 2021No Comments6 Mins Read
Essay Of Raksha Bandhan In Hindi
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Essay Of Raksha Bandhan In Hindi | Essay on Rakshabandhan in Hindi | Hindi Rakshabandhan essay

भाई-बहन का पवित्र त्योहार 

( रक्षाबंधन )

रक्षाबन्धन भारतीय धर्म संस्कृति के अनुसार रक्षाबन्धन  का त्योहार श्रावण माह की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह त्योहार भाई-बहन को स्नेह की डोर में बांधता है। इस दिन बहन अपने भाई के मस्तक पर टीका लगाकर रक्षा का बन्धन बांधती है, जिसे राखी कहते हैं। यह एक हिन्दू व जैन त्योहार है जो प्रतिवर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।

श्रावण (सावन) में मनाये जाने के कारण इसे श्रावणी (सावनी) या सलूनो भी कहते हैं।रक्षाबन्धन में राखी या रक्षासूत्र का सबसे अधिक महत्त्व है। राखी कच्चे सूत जैसे सस्ती वस्तु से लेकर रंगीन कलावे, रेशमी धागे, तथा सोने या चाँदी जैसी मँहगी वस्तु तक की हो सकती है। रक्षाबंधन भाई बहन के रिश्ते का प्रसिद्ध त्योहार है, रक्षा का मतलब सुरक्षा और बंधन का मतलब बाध्य है। रक्षाबंधन के दिन बहने भगवान से अपने भाईयों की तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना करती है।

राखी सामान्यतः बहनें भाई को ही बाँधती हैं परन्तु ब्राह्मणों, गुरुओं और परिवार में छोटी लड़कियों द्वारा सम्मानित सम्बंधियों (जैसे पुत्री द्वारा पिता को) भी बाँधी जाती है। कभी-कभी सार्वजनिक रूप से किसी नेता या प्रतिष्ठित व्यक्ति को भी राखी बाँधी जाती है। रक्षाबंधन के दिन बाजार मे कई सारे उपहार बिकते है, उपहार और नए कपड़े खरीदने के लिए बाज़ार मे लोगों की सुबह से शाम तक भीड होती है। घर मे मेहमानों का आना जाना रहता है।

रक्षाबंधन के दिन भाई अपने बहन को राखी के बदले कुछ उपहार देते है। रक्षाबंधन एक ऐसा त्योहार है जो भाई बहन के प्यार को और मजबूत बनाता है, इस त्योहार के दिन सभी परिवार एक हो जाते है और राखी, उपहार और मिठाई देकर अपना प्यार साझा करते है।

अब तो प्रकृति संरक्षण हेतु वृक्षों को राखी बाँधने की परम्परा भी प्रारम्भ हो गयी है। हिन्दुस्तान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पुरुष सदस्य परस्पर भाईचारे के लिये एक दूसरे को भगवा रंग की राखी बाँधते हैं।

आर्यों ने जिस प्रकार से जातियों को चार भागों ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, और शूद्र में विभाजित किया था। उसी प्रकार चार जातियों के साथ चार त्योहारों का सम्बन्ध है। ब्राह्मणों का मुख्य त्योहार श्रावणी था। इसका दूसरा नाम रक्षा-सूत्र बाँधने से रक्षाबंधन पड़ा। और आगे चलकर यही श्रावणी जिसे अब रक्षा बन्धन के नाम से जाना जाता है। भाई और बहन का त्योहार बन गया जिसे आज और आगे भी मानते जायेंगे। 

Essay Of Raksha Bandhan In Hindi

किसी का माथा क्यों सुना रहे…किसी की थाली क्यों इंतजार करे…… 

रक्षाबंधन की मिठास ही इसकी खूबी है। एक रेशम का धागा जब बंधता है, तो मन की सारी गिरहें खुल जाती हैं। बचपन में जिस बहन की चोटी खींचकर उसे सताया था, आज उसके सामने बैठकर बंधवाना शान का संबंध बन जाता है। जिन्होंने बचपन से इसे नहीं जिया, उनके लिए राखी का दिन उस कमी की याद दिला जाता है।

बेशक कोई बहुत बड़े हवेलीनुमा घर में रह रहा हो,उसके पास बहुत बड़ी गाड़ी हो, सोशल मिडिया में हजारों दोस्त हों लेकिन मन की बात कहने के लिए आज भी मन, भाई या बहन को ही ढूढंता है। ऐसा रिश्ता जिसमें छोटे-छोटे झगड़ें हो, बड़ी बातें साझा हों, और जो जीवन के हर मोड़ पर बिन कहे हमारी बात समझ ले, जो हमारी रूचि, पसंद-नापसन्द को जानता हो, सुख-दुःख में जिसकी याद सबसे पहले आए।

अगर इस रिश्ते में कुछ अधूरापन है, भाई है, बहन नहीं या बहन है, भाई नहीं तो अपनी रिश्तेदारी या करीबियों में इसकी तलाश कर लेना बहुत बेहतर होगा।  इस त्योहार हो मनाने भर के लिए नहीं, बल्कि जीवन-भर के अटूट रिश्ते के लिए। 

जरुरी और अच्छा है पहल करना…… 

आज (रक्षाबंधन)  के दिन माता-पिता से तो कभी ईश्वर से इस बात की नाराज़गी व्यक्त करते हुए आँखे छलछला जाती हैं कि हमें भाई या बहन क्यों नहीं मिली। 

बहुत लाज़मी है यह शिकायत।दूसरे घरों में बहनों के नाज़  या भाइयों का लाड़ देखते हैं, बहनों के हाथ में रची मेहंदी, उनका दूकान-दुकान घूमकर भाई के लिए राखी तलाशना या बहन को देने के लिए भाई की उपहार की तलाश दिखती है, तो ख़ालीपन का एहसास और बढ़ जाता है।

  पर सच तो यह है कि प्रेरणा मिलनी चाहिए, परिवार या मित्र के घर में भाई या बहन के लिए यह पहल करने के लिए। कोई ख़ास है, जिसे आप ख़ास महसूस करा सकते हैं।  पहल करना इसलिए भी जरुरी है कि इससे रिश्ते बनाना, निभाना और बनाए रखना सीखा जा सकता है। 

पर्व को मनाएं, बिताएं नहीं…….

भाई-बहन के रिश्ते में जहाँ प्रेम है, दुलार है, नोकझोंक है तो वही मित्रता का भी भाव होता है। बड़ी बहन माँ जैसी तो बड़ा भाई पिता तुल्य समझे जाते हैं और छोटे हमेशा मित्र जैसे होते हैं। 

जिस परिवार में बहन-भाई  दोनों होते हैं उसे पूरा समझा जाता है, लेकिन ऐसे परिवार भी हैं, जहाँ बहनों के भाई नहीं हैं या ऐसे भी भाई हैं जिनकी बहन नहीं है। वे इस दिन खुद को अकेला महसूस करते हैं।  त्योहार के दिन वे मोबाइल या टीवी से चिपके रहते हैं या सारा दिन जानबूझकर सोते रहते हैं कि किसी भी तरह ये दिन गुजर जाए।

लेकिन ऐसा क्यों होना चाहिए ? बेहतर है वे बुआ, मौसी, मामा, चाचा या ताऊ के बेटे या बेटी के पास चले जाएं।  आप पहल क्यों करें, यह सवाल मन में आ सकता है, तो जवाब है कि ख़ुशी पाने के लिए ख़ुशी देनी भी पड़ती है। 

Essay Of Raksha Bandhan In Hindi

उपसंहार

आज यह त्योहार हमारी संस्कृति की पहचान है और हर भारतवासी को इस त्योहार पर गर्व है। आज कई भाइयों की कलाई पर राखी सिर्फ इसलिए नहीं बंध पाती क्योंकि उनकी बहनों को उनके माता-पिता ने इस दुनिया में आने ही नहीं दिया। यह बहुत ही शर्मनाक बात है कि जिस देश में कन्या-पूजन का विधान शास्त्रों में है वहीं कन्या-भ्रूण हत्या के मामले सामने आते हैं। यह त्योहार हमें यह भी याद दिलाता है कि बहनें हमारे जीवन में कितना महत्व रखती हैं।

भाइयों और बहनों के लिए रक्षा बंधन का एक विशेष महत्व है। यह त्योहार सिर्फ सामान्य लोगों द्वारा ही नहीं मनाया जाता है, बल्कि इसे देवी-देवताओं द्वारा भी भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते को कायम रखने के लिए मनाया जाता है।

राखी का भाईयों-बहनों के लिए एक खास महत्व है। इनमें से कई सारे भाई-बहन एक-दूसरे से व्यावसायिक और व्यक्तिगत कारणों से मिल नहीं पाते, लेकिन इस विशेष अवसर पर वह एक-दूसरे के लिए निश्चित रुप से समय निकालकर इस पवित्र पर्व को मनाते हैं, जो कि इसकी महत्ता को दर्शाता है। हमें इस महान और पवित्र त्योहार के आदर्श की रक्षा करते हुए इसे नैतिक भावों के साथ खुशी-खुशी मनाना चाहिए।

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