Essay On News Paper In Hindi समाचार पत्र पर निबंध 

Essay On News Paper In Hindi

समाचार पत्र पर निबंध 

आज कल सभी मनुष्य इतने व्यस्त हो गए है। कि हमारे आस पास क्या चल रहा है  इसका भी पता नहीं रहता है, और जब सुबह न्यूज़ पेपर पढ़ते समय जब कोई हमारे पास की कोई घटना उसमें छपी होती है तो हमें मालूम चलता है की हमारे आस पास क्या चल रहा है। और यही नहीं हमारे घर से लाखों मील दूर घटी कोई घटना हमें सुबह न्यूज़ पेपर के माध्यम से जानने को मिल जाती है। यह सब इतना आसान हो पाया केवल न्यूज़ पेपर के माध्यम से। अब तो बिना न्यूज़ पेपर के बिना कल्पना करना काफी कठिन सा लगता है।

यह अब सुबह की चाय की तरह जरुरी हो गया है। जिसे सुबह से देख कर दुनिया के बारे में जानने का मन करता है। यह अब हमारे जीवन का एक हिस्सा सा हो गया है। जिसे अलग नहीं किया जा सकता। न्यूज़ पेपर के माध्यम से ही हमें राजनितिक,आर्थिक,सामाजिक,वैज्ञानिक,बेरोजगारी, खेल-स्वास्थ,अन्तरराष्ट्रीय समाचार,शिक्षा, त्योहारों, तकनीकी आदि से जुड़ी जानकारियाँ प्रदान की जाती है। यह हमारे ज्ञान और कौशल को बढ़ाने में भी सहायता करता है। 

प्रस्तावना-

जिज्ञासा मानव की स्वाभाविक स्वभाव (प्रवृति) है। इसका मुख्य कारण यह है कि अन्य प्राणियों की अपेक्षा मानव में चिन्तनशक्ति अधिक है। मनुष्य के ज्ञान की प्यास कभी नहीं बुझती। जितना ज्ञान पढ़ता जाता है। उससे ज्ञान की प्यास बढ़ती जाती है। साहित्य ही उसके मस्तिष्क की प्यास को बुझा सकता है। इस दृष्टि से देश-विदेश की सम्पूर्ण ख़बरों को जानने का एक ही साधन है –समाचार पत्र (न्यूज़ पेपर )

समाचार-पत्रों की प्राचीन स्वरुप-

प्राचीन समाज में भी समाचारों का आदान-प्रदान होता था। पहले यह कार्य सन्देश वाहकों के माध्यम से किया जाता था। प्रथम समाचार-पत्र का जन्म इटली में हुआ था। इससे प्रभावित होकर इंग्लैण्ड में भी समाचार-पत्रों का प्रकाशन प्रारम्भ हो गया। भारत में इसका जन्म मुगलकाल में ही हुआ। इसी काल में “अखबारात-ई-मुअतले’ नामक समाचार-पत्र का उल्लेख मिलता है। हिंदी में “उदन्त मार्तण्ड” पहला समाचार-पत्र प्रकाशित हुआ। 

समाचार-पत्र की आवश्यकता और उनके प्रकार-

मानव की जिज्ञासा को शांत करने के लिए समाचार-पत्रों का आविष्कार हुआ। विज्ञान ने आज सम्पूर्ण विश्व को एक परिवार  में बदल दिया है। देश-विदेश की घटनाओं का प्रभाव उस पर पड़ता है। अतः समाचार-पत्र ही इस घटनाओं को जानने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है। आज की परिस्थितियों में समाचार-पत्र को एक जरुरी आवश्यकता कहा जाता है। 

समाचार-पत्रों का विकाश-

समाचार-पत्र सोलहवीं शताब्दी की देन हैं। मुद्रण-कला के विकास के साथ-साथ समाचार-पत्रों का प्रयोग और प्रचार बढ़ा। आज ‘हिन्दुस्तान’, ‘नवभारत टाइम्स’, ‘नवजीवन’, स्वतंत्र भारत’, ‘आजतक’ ‘जनसत्ता’, ‘अमर उजाला’, ‘दैनिक जागरण’ आदि उच्चकोटि के अनेक समाचार-पत्रों का प्रकाशन हिंदी समाचार-पत्रों के विकास की सूचना दे रहा है। 

समाचार-पत्रों की उपयोगिता-

प्रत्येक व्यक्ति समाचार-पत्रों के माध्यम से अपनी रूचि के अनुसार सामग्री प्राप्त करता है। हमारे देश में राष्ट्रीय चेतना जाग्रत (जगाने) का श्रेय समाचार-पत्रों को ही है। व्यापारिक क्षेत्र में भी समाचार-पत्रों में विज्ञापन दिए जाते हैं। बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के लिए ‘आवश्यकता’ के कॉलम दिए जाते हैं। विभिन्न परीक्षाओं के परीक्षाफल भी इनके माध्यम से जनसाधारण तक पहुंचाये जाते हैं। कुछ समाचार-पत्रों में मनोरंजन के साथ-साथ खेल-कूद का विस्तृत विवरण भी दिया जाता है।  समाचार-पत्र मनुष्यों के सर्वागीण विकास का प्रमुख माध्यम है। 

समाचार-पत्रों अनुचित प्रयोग से हानियाँ-

जब प्रकाशक एवं संपादक अपने पत्र के प्रचार व प्रसार के लिए दूषित साधन अपनाते हैं, पीत-पत्रकारिता (सनसनी फैलाने वाले समाचार या ध्यान-खींचने वाले शीर्षकों का बहुतायत में प्रयोग) पर आधारित भ्रामक एवं रष्ट्र-विरोधी ख़बरें छाप देते हैं, धार्मिक उन्माद भरते हैं तो इससे राष्ट्रीय एवं साम्प्रदायिक एकता को आघात पहुँचता है। वस्तुतः समाचार-पत्रों का मूल उद्देश्य मानव-कल्याण है। किन्तु जब हम स्वार्थवश इस उद्देश्य को भूलकर इनके द्वारा अपने संकीर्ण (बुरे) उद्देश्यों को पूरा करना चाहते हैं तो उनसे लाभ के स्थान पर हानि ही होती है। 

समाचार-पत्रों का उत्तरदायित्व और भविष्य-

समाचार-पत्रों का उत्तरदायित्व है कि मानवता एवं समाज तथा राष्ट्रविरोधी किसी भी समाचार की कभी भी प्रकाशित न करें। कभी ऐसे समाचार प्रकाशित न करें जिससे जनता भ्रमित हो और उसका नैतिक और चारित्रिक पतन हो। यदि समाचार-पत्र अपने उत्तरदायित्व का ईमानदारी के साथ निर्वाह करें तो निश्चय ही इनका भविष्य उज्जल है। 

उपसंहार-

हमारे देश में समाचार-पत्रों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। हमारा देश अभी विकास के बाल्यकाल से ही गुजर रहा है, अतः हमारे समाचार-पत्रों में जनहित की सामग्री का होना अत्यंत आवश्यक है।  स्वस्थ समाचार-पत्र सरकार की नीतियों को सही रूप में जनता के सामने रखेंगे तो इसमें संदेह नहीं कि देश का पूर्ण विकास संभव हो सकेगा। 

Essay On News Paper In Hindi

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