Hindi Essay On Indira Gandhi इन्दिरा गाँधी पर निबंध 2022

Hindi Essay On Indira Gandhi/Essay On Indira Gandhi in Hindi/Indira Gandhi Hindi Essay/600 Words Indira Gandhi Essay

Hindi Essay On Indira Gandhi

श्रीमती इन्दिरा गाँधी पर निबंध

100, 200, 300, 500, 600 

शब्दों में 

इन्दिरा गाँधी पर निबंध 

प्रस्तावना – क्रांतिवादिनी श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने समय-समय पर राष्ट्र की अनेक आतंरिक व बाहरी चुनौतियों का सामना किया और उनकी कसौटी पर खरी उतरीं। इन्होंने स्वराष्ट्र की स्थितियों को बदला और विभिन्न समस्याओं का समाधान करके विकास की नई दिशाओं की खोज की।

प्रारम्भिक जीवन – श्रीमती इन्दिरा गाँधी भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और श्री जवाहरलाल नेहरू की सुपुत्री थीं। इनका जन्म 19 नवम्बर, सन् 1917 ई० को राष्ट्रवादी आंदोलन के तीर्थ स्थल इलाहाबाद में हुआ था। इनके व्यक्तित्व पर पितामह श्री मोतीलाल नेहरू और पिता श्री जवाहरलाल नेहरू जी की अमिट छाप अंकित थी। इनके सार्वजनिक जीवन का प्रारम्भ 3 वर्ष की अल्पावस्था में ही हो गया था। इन्होंने सन् 1930 ई० में  कांग्रेस की बैठक में पहली बार भाग लिया था जबकि जबकि इनके माता-पिता सरकारी मेहमान बने हुए थे। दस वर्ष की अवस्था में इन्होंने “वानर सेना” बनाई थी जो कांग्रेस के असहयोग आंदोलन में सहायता पहुँचाया करती थी। इस तरह इनका बचपन देश की घटनाओं के साथ जुड़ा हुआ है। इनका विवाह पत्रकार फिरोज गाँधी जी से हुआ था, जो आगे चलकर सुयोग्य सांसद और एक प्रमुख अंग्रेजी पत्र के सम्पादक बने। 1959 ई० में इन्दिरा गाँधी जी को सर्वसम्पति से कांग्रेस दल की अध्यक्षा चुनी गई थीं।  सन् 1960 ई०  में पति के आकस्मिक निधन से आपको गहरी चोट पहुँची थी; किन्तु संतान को पिता का साया उठ जाने का दुःख महसूस नहीं होने दिया। दोनों पुत्रों को लन्दन में शिक्षा दिलाई।

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प्रधानमंत्री पद – लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद श्रीमती इन्दिरा गाँधी 48 वर्ष की अवस्था में 24 जनवरी, 1966 ई०  को भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री बनी थीं। सन् 1966 के आम चुनाव में बहुमत पाने के बाद प्रधानमंत्री बनी रही थी। सन् 1971 ई० में पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण किया, परन्तु उसे पराजित होना पड़ा। इतना ही नहीं, पाकिस्तान का एक बड़ा भाग पूर्वी पाकिस्तान स्वतंत्र होकर ‘बांग्लादेश’ कहलाया।  यह सब इन्दिरा गाँधी जी के नेतृत्व में हुआ। इन्दिरा जी ने बांग्लादेश को अपने पैरों पर खड़ा होने में मदद दी थी। सारे राष्ट्र ने इन्दिरा गाँधी जी के साहस की खूब सराहना की। 24 मार्च, 1977 ई०  तक इंदिरा गाँधी जी प्रधानमंत्री पद पर बनी रहीं।

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उतार-चढ़ाव के दौर – सन् 1975 ई० में आपकी स्थिति कुछ कारणवश बिगड़-सी गई। फलतः आपातकाल की घोषणा करनी पड़ी।  विपक्ष के नेता जेलों में बंद कर दिए गए। इससे जनता अंदर ही अंदर क्षुब्ध हो उठी। 18 जनवरी, 1977 ई० को लोक-सभा चुनाव कराने की घोषणा कर दी गई। इस चुनाव में आपको भारी हार मिली और ग्यारह वर्ष तक प्रधानमंत्री बने रहने के बाद यह पद छोड़ना पड़ा। इस तरह आपके जीवन में काफी उतार-चढ़ाव आये। जनता सरकार ने आपको जेल भेजा। विशेष अदालतों का गठन करके आप  पर मुक़दमे चलाए गए।  इस बीच नवम्बर, 1978 ई० में आप चिकमंगलूर से संसद सदस्य चुनी गई; किन्तु संसद की विशेषाधिकार समिति ने आपको विशेषाधिकार के हनन का दोषी पाया। अंत में आपको जनता पार्टी की आपसी फूट का लाभ पहुँचा। आपने पहले चौधरी चरणसिंह को समर्थन देकर मोरारजी की सरकार गिरा दी और बाद में वही समर्थन वापस लेकर चौ० चरणसिंह की सरकार की भी वही दशा कर दी। 

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विश्व-इतिहास में पहली घटना – इसके बाद 3 जनवरी और 7 जनवरी, 1980 ई० को लोकसभा के चुनाव हुए। इसमें आपको आशा से बढ़कर कामयाबी मिली। आपकी पार्टी कांग्रेस (इ) दो-तिहाई बहुमत से विजयी हुई। 14 जनवरी, सन् 1980 को आपके प्रधानमंत्रित्व में स्थायी सरकार बन गई। इस तरह आपको राष्ट्र को विकसित करने का पुनः अवसर मिला। विश्व इतिहास की यह पहली घटना थी चुनाव में हार के ढाई साल बाद ही कोई राजनीतिज्ञ पुनः बहुमत से देश की बागडोर संभालने में समर्थ हुआ था। 

उपसंहार –  इन्दिरा जी के अंदर सहस, दूर-दृष्टि और जन-भावनाओं को समझने की विलक्षण क्षमता थी। 23 जून, 1980 को प्रिय पुत्र संजय की आकस्मिक मृत्यु ने आपको गहरी चोट पहुंचायी थी, फिर भी आपका साहस डिगा नहीं था। आप जबकि राष्ट्र को उन्नति के शिखर पर पहुँचाने में लगी हुई थीं, 31 अक्टूबर, 1984 ई० को प्रातः 9 बजे आपके दो अंगरक्षकों ने गोलियों से भून डाला। आप राष्ट्र के लिए बलिदान हो गई।  आपकी समाधी शक्ति स्थल शांति वन और विजय घाट के बीच बनी हुई है। यदि हम श्रीमती गांधी के सपनों को पूरा कर पाए, तो यही हमारी उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। 

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